संक्रमण के कारण मृत्यु, Cadbury से Fevicol तक iconic विज्ञापन बनाने वाले पीयूष पांडे का आखिरी सफर
Piyush Pandey : भारतीय विज्ञापन की दुनिया को आज एक बड़ा झटका लगा। 24 अक्टूबर को महान विज्ञापन दिग्गज पीयूष पांडे का अचानक निधन हो गया। वह केवल 70 साल के थे। एक महीने से वह कोमा में थे। Ogilvy ने बताया कि वह एक संक्रमण से लड़ रहे थे जो गंभीर हो गया। अंततः शांतिपूर्वक उनका अंत हुआ।
Piyush Pandey को भारतीय विज्ञापन का जनक माना जाता है। उन्होंने 43 साल तक Ogilvy में काम किया। 1982 में वह एक साधारण कर्मचारी से शुरुआत किए, लेकिन अपनी प्रतिभा से Ogilvy के सबसे शीर्ष पद तक पहुंचे। 2024 में वह सेवानिवृत्त हुए। उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया गया था।
Piyush Pandey का जीवन परिचय
5 सितंबर 1955 को Jaipur में जन्म लिया। St. Xavier’s School, Jaipur में पढ़ाई की। Delhi के St. Stephen’s College से History में Post Graduate थे। उनके भाई Prasoon Pandey फिल्म निर्माता हैं। बहन Ila Arun अभिनेत्री हैं। परिवार में 9 बच्चे थे।
विज्ञापन करियर की शुरुआत
- 1982: Ogilvy में trainee से शुरुआत
- पहला विज्ञापन: Sunlight Detergent]
- 1988: Creative department में जाना
- 1994: Board of Directors में शामिल]
- 2023: Chief Advisor बने]

उनके पहले 6 साल client servicing में रहे। फिर creative department में गए। Luna moped, Fevicol, Cadbury और Asian Paints के लिए famous विज्ञापन बनाए। 3 साल बाद Creative Director बने। 1994 में board में आ गए। 12 साल तक Ogilvy रहा No. 1 agency।
पीयूष पांडे के Famous विज्ञापन
Cadbury का “Kuch Khaas Hai” एक iconic campaign था। Cricket field पर एक लड़की नाचती है। यह कामयाब रहा। Fevicol का “Todo Nahi, Jodo” भी famous है। एक bus Fevicol से stuck था। Asian Paints का “Har Khushi Mein Rang Laye” भी उनका काम है।
Vodafone के ZooZoo characters भी उनके creative mind से बने। “Ab ki baar Modi Sarkar” एक political slogan था जो 2014 में famous बन गया। Polio campaign में Amitabh Bachchan ने भी काम किया। उन्होंने Indian advertising को western influence से बाहर निकाला।
सम्मान और पुरस्कार
- Padma Shri (2016)]
- LIA Legend Award (2024)]
- Cannes Lions में पहले Asian Jury President (2020)]
- 600+ national और international awards]
- Triple Grand Prize London International Awards]
उन्हें 600 से ज्यादा awards मिले। Economic Times ने उन्हें “Most Influential Man in Indian Advertising” कहा। उनके campaigns cultural touchstones बन गए। पूरी भारतीय जनता से उनके विज्ञापन जुड़े थे।
विरासत और प्रभाव
पीयूष पांडे ने Indian advertising को अपनी आत्मा दी। उन्होंने Hindi और colloquial भाषा का उपयोग किया। Western-style ads को Indian style में convert किया। हर विज्ञापन में emotion और culture था। उन्होंने सिद्ध किया कि advertising सिर्फ selling नहीं है, बल्कि emotional connection है।
Prime Minister Modi, Union Ministers और Business leaders ने उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। 25 अक्टूबर को Shivaji Park Crematorium में अंतिम संस्कार होना है। विज्ञापन की दुनिया के लिए यह बहुत बड़ी loss है। उनके काम और विचार सदा भारतीय advertising का हिस्सा रहेंगे।
यह भी पढ़ें :-
- गायक-अभिनेता Rishabh Tandon उर्फ Fakir का 35 साल की उम्र में निधन: दिल की बीमारी ने ली जान
- The Taj Story : ताजमहल के 22 बंद कमरों का रहस्य, Paresh Rawal की कोर्टरूम ड्रामा 31 अक्टूबर को
- Samvardhana Motherson: Volkswagen की चिंता, BMW की चेतावनी, शेयर पर दबाव, क्या अब गिरता रहेगा?
- Business Ideas 2026 : शुरू करें ये बिजनेस, घर बैठे कमाएं लाखों! पड़ोसी भी हो जाएंगे हैरान








