Sensex Nifty Stock Market : 12 जनवरी 2026 को संवेदनशील सूचकांक (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले। शेयर बाजार में आंदोलन काफी ज्यादा था जिससे छोटे और बड़े निवेशकों को परेशानी हुई। अमेरिकी तनाव और गुंजाइश की चिंताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रहा। निफ्टी 50 में 25,700 के उपर पहुंचने के बाद गिरावट की ओर लौट गया। संवेदनशील सूचकांक भी कुछ अंकों में कमी दिख रहा है। यह एक चिंताजनक स्थिति है जहां investors को अपने निवेश के बारे में सोचना पड़ रहा है।
भारतीय Share Market पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। जब अमेरिकी बाजार में गिरावट आती है तो भारत को भी असर पड़ता है। इसी वजह से आज संवेदनशील और निफ्टी दोनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विदेशी निवेशकों ने अपने निवेश को कम किया है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है। Long term investors को ऐसे समय में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए। Short term traders को इस volatility में risks का सामना करना पड़ रहा है।
संवेदनशील सूचकांक और निफ्टी का आंकड़े : Sensex Nifty Stock Market
Share market के महत्वपूर्ण विवरण:
- निफ्टी 50 ने 25,700 का स्तर छुआ फिर गिर गई
- संवेदनशील सूचकांक में भी कमी देखी गई
- अमेरिकी तनाव का सीधा असर भारत पर
- विदेशी निवेशकों की बिक्री बढ़ी
- कुछ sectors में तेज़ गिरावट आई
- बैंकिंग stocks में उथल-पुथल रहा
- pharma stocks पर भी दबाव पड़ा
- overall volatility बहुत ज्यादा रहा
बाजार में closing bell के समय देखा गया कि निफ्टी negative बंद हुई। संवेदनशील सूचकांक भी कुछ सौ अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। इस तरह की movement में retail investors को बहुत घबराहट होती है। लेकिन experts कहते हैं कि यह एक normal सुधार है जो time-to-time होता है।
अमेरिकी बाजार का असर
अमेरिकी Share Market में जब भी कोई नकारात्मक signals आते हैं, तो भारत को असर पड़ता है। American stocks में कमजोरी के कारण global risk appetite भी कम हुई है। जब international investors को अच्छा return नहीं मिल रहा, तो वह emerging markets से अपने निवेश निकाल लेते हैं। भारत एक emerging market है इसलिए हम को इस trend से impact मिलता है। इस बात को समझना important है कि long term में ये movements temporary होती हैं।
Sensex Nifty Stock Market : Fed के decisions और US inflation की जानकारी भी markets को move करती है। जब markets में ये news आते हैं तो buying-selling का कदम बढ़ जाता है। इसीलिए global events पर ध्यान देना जरूरी है।
निवेशकों के लिए सुझाव
इस तरह की volatility में निवेशकों को अपना धैर्य रखना चाहिए। जो लोग long term के लिए निवेश करते हैं उन्हें short term fluctuations से घबराना नहीं चाहिए। Diversification बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप अलग-अलग sectors में invested हैं तो risk कम रहती है। Emergency fund भी रखना चाहिए ताकि जरूरत के समय निवेश से निकालना न पड़े।
SIP (systematic investment plan) के through invest करने वाले को advantage है क्योंकि वह regular intervals पर fixed amount invest करते रहते हैं। इससे average cost down होता है और risk भी कम होता है। Share Market timing को समझना बहुत मुश्किल है इसलिए बेहतर है disciplined निवेश करते रहें।
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