Chief Justice BR Gavai : 6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक अभूतपूर्व घटना घटी जब 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने Chief Justice BR Gavai पर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह घटना कोर्ट रूम नंबर 1 में सुबह 11:35 बजे हुई जब न्यायाधीश केस की सुनवाई कर रहे थे। सुरक्षा गार्डों ने तुरंत वकील को हिरासत में लिया, लेकिन Chief Justice BR Gavai ने शांति से सुनवाई जारी रखी।
यह घटना सितंबर में CJI के विवादित बयान के बाद हुई है जब उन्होंने खजुराहो के विष्णु मूर्ति मामले में “देवता से खुद कुछ करने को कहें” जैसी टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ और बाद में CJI ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब गलत समझा गया और वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।
घटना की विस्तृत जानकारी और PM Modi की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए Chief Justice BR Gavai से बात की। PM ने X पर लिखा, “CJI पर यह हमला हर भारतीय को गुस्से में डाल दिया है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों की कोई जगह नहीं है। यह पूरी तरह से निंदनीय है।” प्रधानमंत्री ने CJI की शांत प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखती है।

हमलावर वकील और उसकी पृष्ठभूमि : Rakesh Kishore
- राकेश किशोर : Rakesh Kishore 71 वर्षीय वकील, मयूर विहार दिल्ली का निवासी
- बार सदस्यता: 2011 से Supreme Court Bar Association का सदस्य
- घटना का कारण: CJI के विष्णु मूर्ति संबंधी टिप्पणियों से नाराज़गी
- नारेबाजी: “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” के नारे लगाए
- तुरंत रिहाई: दिल्ली पुलिस ने बिना केस दर्ज किए रिहा कर दिया
Chief Justice BR Gavai की गरिमापूर्ण प्रतिक्रिया
- शांत रवैया: “इन सब बातों से विचलित न हों, ये चीज़ें मुझे प्रभावित नहीं करतीं”
- सुनवाई जारी रखी: घटना के तुरंत बाद कोर्ट की कार्यवाही बिना रुकावट के जारी रखी
- कोई केस नहीं: CJI ने हमलावर वकील के खिलाफ कोई मामला दर्ज न करने का निर्देश दिया
- जूता वापसी: CJI के कार्यालय ने पुलिस से कहा कि वकील का जूता भी वापस कर दिया जाए
- सभी धर्मों का सम्मान: पहले भी स्पष्ट किया था कि वे सभी धर्मों का आदर करते हैं
- संयम की मिसाल: पूरी घटना के दौरान असाधारण धैर्य और गरिमा का प्रदर्शन
- संवैधानिक मूल्य: न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखा
- व्यावसायिकता: व्यक्तिगत हमले के बावजूद भी न्यायिक कर्तव्यों को प्राथमिकता दी
- समानता का संदेश: सभी के साथ न्यायसंगत व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत किया
- राष्ट्रीय एकता: धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया
राजनीतिक दलों और कानूनी बिरादरी की प्रतिक्रिया
- कांग्रेस: राहुल गांधी ने कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है
- मल्लिकार्जुन खड़गे: पिछले दशक में नफरत और कट्टरता बढ़ने की बात कही
- विपक्षी एकजुटता: सभी विपक्षी दलों ने घटना की निंदा की और CJI के समर्थन में बयान दिए
- Bar Council Action: हमलावर वकील को तुरंत निलंबित कर दिया गया
- Supreme Court Bar Association: घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया
- Advocates-on-Record Association: कानूनी पेशे की गरिमा पर हमले की निंदा
- सामाजिक चर्चा: दलित समुदाय के CJI पर हमले को लेकर व्यापक बहस शुरू हुई
- मीडिया कवरेज: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में व्यापक कवरेज मिली
- संवैधानिक चिंताएं: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरे की चर्चा
- सुरक्षा समीक्षा: सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू की गई
Chief Justice BR Gavai की इस घटना में दिखाई गई गरिमा और संयम ने उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिलाया है। उनकी शांत प्रतिक्रिया ने दिखाया कि भारतीय न्यायपालिका कितनी मजबूत और निष्पक्ष है। यह घटना भारत में धार्मिक सद्भावना और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को भी रेखांकित करती है।
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