Rajasthan Police ने 18 नवंबर को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस ने Indian School of Business (ISB) के साथ मिलकर Rajasthan Police Academy में एक विशेष workshop आयोजित किया। इस workshop का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों और पुलिस कर्मियों को नकली खबरें, deepfakes और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनी गलत जानकारी को पहचानना सिखाना था। DGP Rajeev Sharma ने कहा कि नकली खबर अब “सूचना युद्ध” का एक हथियार बन गई है, जो कानून-व्यवस्था को खतरे में डाल सकती है।
राजस्थान में 9 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और इनमें से 34% सोशल मीडिया पर भरोसा करते हैं। 18-24 साल की उम्र वाले युवा सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं क्योंकि वह नकली जानकारी को आसानी से मान लेते हैं। पहले जो पुरानी वीडियो होती थीं उन्हें नई घटना के रूप में प्रस्तुत किया जाता था और लाखों लोगों तक कुछ ही सेकंड में पहुंच जाती थी।
Nalanda Auditorium में हुआ यह महत्वपूर्ण आयोजन
Rajasthan Police Academy के Nalanda Auditorium में इस workshop का आयोजन किया गया। इसमें पत्रकार, सोशल मीडिया प्रभावशाली और पुलिस के senior officers शामिल हुए। ISB की 10 सदस्यीय टीम ने इस training को conduct किया, जिसमें Professor Manish Gangwar और Major Vineet Kumar मुख्य थे।

Workshop में शामिल मुख्य अधिकारी:
- DGP Rajeev Sharma (निदेशक, उद्घाटन समारोह)
- Sanjay Agarwal (साइबर अपराध निदेशक)
- VK Singh (Additional DGP – Cyber Crime)
- Ajay Pal Lamba (Inspector General of Police)
- Kunwar Rashtradeep (DIG)
- SPs Rashi Dogra और Shantanu Singh
deepfakes क्या हैं और क्यों खतरनाक हैं : Rajasthan Police
deepfakes वह वीडियो या ऑडियो होती हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई जाती हैं। इनमें किसी भी व्यक्ति का चेहरा, आवाज़ या हाथ-पैर की गति को fake तरीके से दिखाया जा सकता है। ये इतनी असली लगती हैं कि साधारण लोग को पता ही नहीं चल पाता कि वह नकली है।
DGP ने कहा कि ये नकली खबरें और deepfakes:
- कानून-व्यवस्था को खतरे में डाल सकती हैं
- मानसिक परेशानी पैदा करती हैं
- आर्थिक धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होती हैं
- समाज में अशांति फैला सकती हैं
पत्रकारों को क्या सीखना चाहिए
Workshop में पत्रकारों को सिखाया गया कि breaking news को तुरंत प्रसारित करने से पहले:
- तीन बार check करें कि जानकारी सही है या नहीं
- विश्वसनीय sources से verify करें
- अगर संदेह हो तो पुलिस से संपर्क करें
- किसी भी unverified claim को प्रसारित न करें
DGP Sharma ने कहा: “गलत रिपोर्ट्स से अपूरणीय नुकसान हो सकता है। पत्रकार और पुलिस दोनों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि सिर्फ verified जानकारी ही जनता तक पहुंचे।”
technology का सही इस्तेमाल
Workshop में AI-based tools सिखाए गए जो:
- deepfakes को पहचान सकते हैं
- fake videos को detect कर सकते हैं
- ऑडियो की असलियत जांच सकते हैं
- पुरानी vs नई वीडियो को अलग कर सकते हैं
Professor Manish Gangwar ने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करना चाहिए, गलत सूचना फैलाने के लिए नहीं।
India का national strategy
भारत सरकार पहले से ही इस समस्या का समाधान कर रही है:
- Information Technology Act के तहत कानूनी कार्रवाई
- CERT-In का cyber security alert system
- Deepfakes Analysis Unit की WhatsApp tipline
- Misinformation Combat Alliance की गतिविधियां
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